Saturday, 27 June 2020

Digital Shayari Class Series: Week 8 Module 8 : आलेख 2 : मुशायरे की शब्दावली



कहकशाँ दोस्तों की लिए कुछ आम सुने जाने वाले शब्दों की फहरिस्त [लिस्ट] पेश है जो कभी प्रत्यक्ष या स्क्रीन पर मुशायरा सुनते समय आपको उसका हिस्सा बनने में मदद देगी। शायद ही कहीं ऐसी लिस्ट छपी हो, उम्मीद है पसंद आएगी......आनंद कक्कड़
मोहोतरम = महोदय
श्रीमान, मोहतरमा=महोदय, श्रेस्ठ महिला, 
जनाब-ए-आली=मान्य महोदय, your highness  खैरमक़दम है = स्वागत है, 
मतला पेश है= ग़ज़ल का पहला शेर प्रस्तुत है,  शेर= couplet, 
मुक़र्रर = फिर से, दोबारा (शेर को पुनः सुनने के लिए शायर से अनुरोध करना), 
अर्ज़ किया है= ग़ज़ल पेश करने से पूर्व श्रोताओं के ध्यान अपनी तरफ करके के लिये शायर कहता है। वाह वाह = शेर पर दाद देना, 
सदारत= अध्यक्षता, 
वकार = महिमा, गरिमा, 
आपकी जानिब= आप की तरफ (attention), निज़ामत = मुशायरे का संचालनकर्ता, 
शोअरा= शायर, 
तब्-ए-शोअरा = temperament of poets, सामईन= श्रोतागण,
शम्मा-ए- महफ़िल = lamp of assembly (किसी शायर को पढ़ने के लिए जानते समय प्रयोग होता है कि अब आप महफ़िल को रोशन कीजिये अपने कलाम से), 
अहल-ए-महफ़िल = people of assembly, अहल-ये-नज़र = people of vision (अहले नज़र' से मुराद ऐसे लोग हैं जिन्हें 'बोध' प्राप्त है, जो सही बात को ग़लत बात से अलग करके देखने की योग्यता रखते हैं)
तरन्नुम से पेश है = गाकर ग़ज़ल सुनना, 
तहत में पेश करना = पढ़ कर ग़ज़ल सुनना, शिरकत = सम्मिलित होने, 
मौसूफ़ा = योग्य (नाहिला जे लिए प्रयोग), 
ज़ेर ज़बर और पेश की गलतियां= ग़ज़ल व्याकरण और उच्चारण की गलतियां। 
नशिस्त = gathering/ assembly 
मुशायरा लूट लिया = श्रोताओं पर अपनी रचना से शायर का छा जाना, 
मुन्तज़िम= प्रबंधक, 
इल्तिज़ा है = requesting you, 
क़ामयाब मुशायरा = सफल आयोजन,
दा’वत-ए-सुख़न = शायरी पेश करने का स्वागत, अहल-ए-सुख़न = कवि, शायर, 
शरीक़ होइए = शेर को समझिये ध्यान दीजिये, दाद= appreciation, अच्छे कलाम की प्रशंसा करना, 
मिसरा उठाइये = शायर शेर की पहली लाईन पर विशेष ध्यान देने के किये कहता है जिससे पूरा शेर श्रोता समझें। 
मुशायरे का इख़्तिताम= समाप्ति
मक़्ता पेश है= ग़ज़ल का आखिरी शेर जिसमें शायर का तख़ल्लुस (उपनाम) आता है।


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