याद है पंचम – Yaad Hai Pancham (Hindi)
आर डी बर्मन की याद में गुलज़ार ने एक नज़्म लिखी जिसे उन दोनों के एक तीसरे साथी गायक भपिंदर सिंह ने कंपोज़ किया और गया भी । ग़ज़ब की immortal नज़्म बन कर तैयार हुई। भूपिंदर ने आज़ाद नज़्म गाने की महारत हासिल की है। आप सुनकर स्वयं नज़्म के जादू में खो जाएंगे-
नज़्म - याद है पंचम
याद है बारिशों का दिन पंचम
जब पहाड़ी के नीचे वादी में,
धुंध से झाँक कर निकलती हुई,
रेल की पटरियां गुजरती थीं–!
धुंध में ऐसे लग रहे थे हम,
जैसे दो पौधे पास बैठे हों,.
हम बहुत देर तक वहाँ बैठे,
उस मुसाफिर का जिक्र करते रहे,
जिसको आना था पिछली शब, लेकिन
उसकी आमद का वक्त टलता रहा!
देर तक पटरियों पे बैठे हुये
ट्रेन का इंतज़ार करते रहे.
ट्रेन आई, ना उसका वक्त हुआ,
और तुम यों ही दो कदम चलकर,
धुंद पर पाँव रख के चल भी दिए
मैं अकेला हूँ धुंध में पंचम!!
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